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क्या होती है zero fir,fir और charge sheet

 जितनी भी क्राइम होते हैं। वह दो तरह के क्राइम होते हैं। एक है कॉग्निजेबल क्राइम। दूसरा है नन -कॉग्निजेबल क्राइम। नन -कॉग्निजेबल क्राइम में नार्मल रिपोर्ट लिखी जाती है। शॉर्टकट में इसे एनसीआर और बिहार में सना बोला जाता है। उदाहरण के तौर पर ले तो जैसे किसी का मोबाइल चोरी हो गई है। जिसमें आपकी सिम कार्ड थी। जिससे आपका मिस यूज हो सकता था। जब हम मोबाइल चोरी होने की रिपोर्ट लिखवाते है ,तो इस मामले में पुलिस उतनी गंभीरता से जांच नहीं करती है 90 दिन के अंदर पुलिस अपने सीनियर अधिकारी को कहती है, यह मामला नॉर्मल था इसको छोड़ देते हैं और रिकॉर्ड में इसका यूज रख देते हैं।एनसीआर लिखने के बाद अगर कोई मिस यूज होता है ,तो उसका जिम्मेदार यह आदमी नहीं होगा। 

1. कॉग्निजेबल क्राइम क्या होता है? 

वैसा अपराध जिसमें अपराधी जगन अपराध किया होता है ।जैसे हत्या, लूट, डकैती ,रेप ,धमकी देना तो इसे हम लोग को कॉग्निजेबल क्राइम कहते हैं, और इसके लिए एफ आई आर लिखा जाता है और चार्ज शीट तैयार किया जाता है। 

2.fir क्या होता है? 

जब अपराधी बड़े क्राइम करते हैं ,तो उसके लिए पुलिस रिपोर्ट लिखती है। जिसे हम लोग f.i.r. कहते हैं। सीआरपीसी की धारा 154 के मुताबिक पुलिस को हर हाल में एफ आई आर लिखना होता है । भले ही वह जो व्यक्ति एफआईआर लिखवाने आया है। वह आदमी उस थाना क्षेत्र में है या नहीं पुलिस को हर हाल में एफ आई आर लिखना होता है । जब f.i.r. लिखी जाती है। तो एफ आई आर का सीरियल नंबर होता है। जैसे मान लीजिए 172 /2020 मतलब 2020 में उस थाना में आपका 172 वां रिपोर्ट लिखा गया है। एफ आई आर लिखने के बाद पुलिस इन्वेस्टिगेशन करके पता लगाती है, कि यह सच में f.i.r. सही है या नहीं अगर f.i.r. सही है तो पुलिस अपराधी पर चार्ज शीट बनाती है और जैसे चार्ज शीट बन जाता है। आईपीसी का काम खत्म और कोर्ट का काम शुरू हो जाता है । कोर्ट सीआरपीसी करेगी और फिर अपराधी को जेल दे देगी। 

3.fir का पूरा नाम क्या है? 

FIR का पूरा नाम फर्स्ट इनफॉरमेशन रिपोर्ट होता है। 

4.zero fir क्या होता है? 

जब आप अपने इलाके से हटकर दूसरे इलाके में रिपोर्ट लिखवाते है।तो उसे zero fir कहते हैं जीरो f.i.r मैं कोई नंबर नहीं होता है जीरो एफ आई आर के तहत पुलिस आपको नॉर्मल पूछताछ के लिए बुला सकती है, लेकिन आप पे वारंट नहीं निकाल सकती है। जैसे उदाहरण के तौर पर ले तो सुशांत सिंह का जो केस चल रहा था वह मुंबई में चल रहा था लेकिन उनके पिताजी जो पटना में रहते थे । तो वह पटना में रिपोर्ट लिखा दिए थे जिसके बारे पटना पुलिस मुंबई गई थी पूछताछ के लिए

दूसरा उदाहरण ले तो ऐसा बहुत क्रिमिनल होता है।जिसका थाना में  दबदबा में रहता जैसे कि आसाराम बापू का जो घटना था बहुत पुराना और राजस्थान का मैटर था। लेकिन जब वह लड़की थाने में गई तो उस थाने वाले एफ आई आर नहीं लिखे क्योंकि आसाराम करोड़ों लोगो के आदमी थे ।तब वह लड़की मजबूरी में अपने पिता के साथ दिल्ली आई और दिल्ली में रिपोर्ट लिखवाई। दिल्ली पुलिस को जीरो एफआईआर लिखने के बाद यह मैटर कोर्ट में चला गया उसके बाद आसाराम क्या हाल हुआ या आप सभी को पता है। 

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